Follow by Email

Monday, February 24, 2014

मनोविज्ञान की किताब में पत्नी ,प्रेमिका ...

किसी ने अपनी मनोविज्ञान की किताब में लिखा है की हर आदमी की जिंदगी में एक पत्नी आती है ,,दो प्रेमिकायें आती है और तीन औरतो से वो बाजार में पैसा देकर सबंध बनाता है ।(कहीं पढ़ा )

Wednesday, February 19, 2014

शादी की पाँचवी सालगिरह..

शशांक -प्रियंका 
आज मेरी और प्रियंका की शादी की पाँचवी सालगिरह है .ये पाँच साल हँसते –खेलते ,लड़ते –झगड़ते ,तारीफों-शिकायतों के बीच ऐसे गुजरे की पता ही नहीं चला .सालगिरह तो पाँचवी है लेकिन प्रियंका का साथ पिछले 10 साल से है .प्रेमी से पति बनने का सफर काफी रोमांचक ,मजेदार ,चुनौतीपूर्ण ,प्रेम भरा और मस्ती भरा रहा अब सोचता हूँ कि अच्छा हुआ जो इसमें 5 साल लग गये . हमारी कहानी पूरी फ़िल्मी ही थी सोचा नहीं था कि लेखन/पत्रकारिता के शौक से ही जीवनसाथी मिलेगा ,इस तरह से प्रेम –विवाह होगा. लेकिन जो होता है अच्छे के लिए ही होता है ईश्वर के पास हमारे लिए बेहतर प्लान होता है. वास्तव में पति-पत्नी का रिश्ता बहुत ही खूबसरत होता है .एक दूसरे के सहयोग से दुनियाँ बदली जा सकती है ,कुछ भी हासिल किया जा सकता है ..
ऐसा नहीं कि मुझे चाँद चाहिए 
मुझको तुम्हारे प्यार में विश्वास चाहिए 
न की कभी भी ख्वाहिश मैंने सितारों की
मुझे तो बस ख्वाबों में तुम्हारा दीदार चाहिए
ईश्वर करे हमारा ये रिश्ता हमेशा यू ही मजबूत बना रहें ..आप सभी मित्रों की /बड़ों के आशीर्वाद /शुभकामनायों की आकांक्षा हमेशा बनी रहेगी ...

Tuesday, February 18, 2014

कश्मीर में भारत विरोध का स्वर

शशांक द्विवेदी
पिछले हफ्ते जम्मू -कश्मीर प्रवास के दौरान मैंने कई हिंदू -मुस्लिम युवाओं से विभिन्न मुद्दों पर लंबी  बात की ,उनसे बात करके कई बातें ऐसी आई जो मै पहली बार सुन रहा था .एक मुस्लिम नवयुवक(काफी पढ़ा -लिखा और ३ सरकारी नौकरी छोड़कर अब एक स्कूल का मालिक ) ने बातचीत के दौरान कहा कि कश्मीर के अधिकांश लोग अपना अलग देश चाहते है ,भारत और यहाँ की आर्मी के बारे में उसकी राय काफी खराब थी , भारत को हिंदू बहुल देश मानने की वजह से उसने कहा कि इस्लामिक  आधार पर पाकिस्तान हमारे दिल के ज्यादा नजदीक है..उस युवा ने बिना किसी लागलपेट के मेरे हर सवाल का जवाब बिना कोई झूठ बोले बहुत संजीदगी से  दिया मसलन उसने कहा कि अधिकांश कश्मीरी आर्मी से बेहद नफरत करते है और अलगाववादी आतंकवादियों का समर्थन करते है उन्हें खाना देते है ,पनाह देते है यहाँ तक कि मरने के बाद उनसे सहानुभूति भी जताते है ,अधिकांश कश्मीरी हमेशा पाकिस्तान से लगाव महसूस करते हुए उसे हर जगह जीतते हुए देखना चाहते है ,उसने खुद कहा कि खेल के मैदान में भी हम पाकिस्तान को ही जीतते देखना चाहते है .उस युवा ने अपने दिल की हर बात बहुत ईमानदारी से रखी ,उसने ये नहीं सोचा कि मुझे उसकी बात अच्छी लगेगी या बुरी बल्कि उसने वही कहा जो उसे सच लग रहा था .देश के नेताओं पर उसकी पसंद के बारे में पूछने पर उसने कहा कि अरविंद केजरीवाल उसे बहुत पसंद है .मैंने चौक्तें हुए इसका कारण पुछा तो उसने कहा कि केजरीवाल के प्रधानमंत्री बनते ही हमारा अलग देश बन जाएगा या हम पाकिस्तान में मिल जायेगें क्योंकि उनकी पार्टी के नेता जनमत संग्रह का समर्थन करते है .इस बात पर मैंने उससे कहा कि ऐसा नहीं है केजरीवाल ऐसा नहीं सोचते है और ये संभव नहीं है ,ये कभी नहीं होगा तो उसने कहा कि जरुर होगा !! उसने कहा कि अधिकांश कश्मीरी नरेंद्र मोदी से सख्त नफरत करते है क्योंकि वो हिंदू वादी नेता है ..नवयुवकों से बातचीत के दौरान मुझे जम्मू –कश्मीर में हिंदू –मुस्लिम खाई साफ़ तौर पर नजर आई जम्मू का लगभग हर हिंदू नरेंद्र मोदी के पक्ष में लामबंद दिख वहीं मुस्लिम इसके जबर्दस्त विरोध में दिखे ...

खैर बातचीत के दौरान जिसने जो भी कहा लेकिन सबने हम जैसे टूरिस्ट को भगवान कहा ,सब लोगों ने कहा कि आप लोगों की वजह से ही हम जिंदा है ..लगभग सभी लोगों ने तहेदिल से मेरा स्वागत किया ,अच्छे से बात की ,सम्मान किया ,यात्रा के दौरान खूब मदत की ...लेकिन जम्मू –कश्मीर यात्रा के दौरान की गई बातचीत ने मेरे मन –मष्तिष्क में काफी गहरा असर डाला ,सोचता रहा कि क्यों कश्मीर के लोग आज भी भारत को अपना नहीं पाए ,क्यों आज तक भारत को अपना देश नहीं मान पायें ...

वर्जिनिटी का मुकुट

 मनीषा पांडे
अगर मुझे अपने परिवेश से इस बात के लिए भयानक गुस्‍सा है कि बचपन में उन्‍होंने मुझे एक मूर्ख, डरपोक और वर्जिनिटी का मुकुट गर्व से भरकर अपने माथे पर सजाने वाली लड़की की तरह पालने में कोई कसर नहीं छोड़ी तो मुझे थोड़ा दुख अपने भाइयों के लिए भी मना लेना चाहिए क्‍योंकि उनको भी कठोर ताड़ का पेड़, प्रेमरहित ठूंठ बनाने में इस सिस्‍टम ने कोई कसर नहीं छोड़ी। मुझे सिखाने की कोशिश की कि तुमको अपने जीवन की कोई जिम्‍मेदारी लेनी की जरूरत नहीं। बाप पालेंगे, बियाह कर देंगे और उसके बाद पति जिंदगी भर पालता रहेगा। तुम्‍हें सोचने की क्‍या जरूरत कि तुम कैसे सर्वाइव करोगी। और मेरे भाइयों के दिमाग में बचपन से ठूंस दिया गया कि शादी के बाद बीवी-बच्‍चों को पालना है, बुढ़ापे में मां-बाप को पालना है। बेचारा, जिंदगी भर सबको पालता ही रहे। मैं कमजोर और भावुक हो सकती थी, रो सकती थी, चंचल हो सकती थी, लेकिन बेचारे मर्दानगी से भरे भाइयों को रोना अलाउ नहीं था। वो मर्द के पट्ठे हैं। छाती तानकर लाठी भाजेंगे, खून बहाएंगे, लड़के के सीने में सिर छुपाकर रोएंगे थोड़े न। मुझे सिखाने की कोशिश हुई कि अच्‍छी, चरित्रवान लड़कियों को शादी के पहले किसी मर्द को हथेली की सबसे छोटी उंगली का पोर भी छूने की इजाजत नहीं देनी चाहिए और भाई के लिए नो वर्जिनिटी टैग। बेचारे भाई, खून से खत लिखते फिरते, अपनी बहनों की वर्जिनिटी को सात तालों में, सात पर्दों में रखते और खुद बेचैन फिरते कि कोई तो मिल जाए। भाई खुद किस करना चाहते थे और बहनों को किस से वंचित रखना चाहते थे। अब कैसे करेंगे किस क्‍योंकि तुम्‍हारी बहन पर निगाह टिकाए आदमी ने भी तो अपनी बहन को बंद कर रखा है। कैसा दुखद कुचक्र है। बहनें किस कर नहीं पाती थीं और भाइयों को किस करने के लिए कोई मिलती नहीं थी। वर्जिन तो रह गए दोनों ही।
नॉउ कुकिंग इज सच ए फन, बेचारे भाई जानते ही नहीं। किसी को प्‍यार करना, उसके लिए अपने हाथों से कुछ बनाना कितने मजे की बात है। दिल भीग-भीग जाता है प्‍यार से। लेकिन भाइयों को क्‍या मालूम, उन्‍हें तो सिर्फ ऑर्डर लगाना सिखाया गया। बच्‍चे की नैपी चेंज करना भी फन है। मुझे तो मजा आता है। "ओ लिटिल मंकी, ज्‍यादा कूदो मत। इतना हिलोगी तो नैपी कैसे बदलूंगी। यार प्‍लीज, मुझे मजा आ रहा है क्‍या तुम्‍हारी गीली नैपी बदलने में। दो मिनट, हिलना बंद करो। अरे वाह, हो गया। अब फिर सूसू कर देना दस मिनट में।" भाई लोग ऐसे प्‍यार में भीगे-नहाए नन्‍ही परी से बात करते हुए उसकी नैपी नहीं चेंज करते। ठूंठ हो गए हैं सब, मर्दानगी में। बेचारे, जानते ही नहीं कि उनकी परवरिश ने उन्‍हें किन नाचुक चीजों से वंचित कर दिया। सबके सिर पर बहन-बीवी की इज्‍जत बचाने का बोझ लदा हुआ है। अब बहन-बीवी खुद की इतनी सक्षम हो तो उनका बोझ कम होगा। लेकिन नहीं, लादे रहो अपने सिर पर। अपनी पत्नियों-प्रेमिकाओं के साथ बिस्‍तर पर ऐसे अहंकारी गुंडे। अपना काम किया, कट लिए। उफ, लड़कियां थोड़ा उनके लिए भी दुख मनाएं क्‍योंकि बिलीव मी, दे आर डिप्राइव्‍ड ऑफ द जॉय ऑफ रीअल लव मेकिंग। बेचारे बहुत-बहुत वंचित हैं। नहीं जानते, सचमुच प्‍यार क्‍या होता है।
इस समाज के पुरुष भी बहुत वंचित हैं। प्‍यार से वंचित हैं, घर के कामों में शेयरिंग के सुख से वंचित हैं, स्‍त्री की दोस्‍ती से वंचित हैं, बच्‍चे का टिफिन तैयार करने के सुख से वंचित हैं।
चलो, थोड़ा दुख उनके लिए भी मनाएं।