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Tuesday, May 6, 2014

कथित प्रगतिशील लोगों का संघ के प्रति पूर्वाग्रह !!

शशांक द्विवेदी 
अक्सर कथित प्रगतिशील लोगों को "संघी मानसिकता ",भगवा रंग से रंगे आदि शब्द कहते /लिखते सुना है परमुझे कभी समझ में नहीं आया कि "संघी मानसिकता "क्या है ?
मेरा बचपन की पूरी पढाई शिशु से लेकर अष्टम तक संघ स्वचालित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई ..ये मेरे जीवन का वो समय था जहाँ से मैंने सब कुछ अच्छा सीखा और आज भी वही संस्कार मेरे जीवन में है ..आज भी सोकर उठनेके बाद सुबह अपने आप हाथ करबद्ध हो जाते है "कराग्रे वस्ते लक्ष्मी " कहते हुए ,खाते समय भोजन मंत्र अपने आप दिमाग में आ जाता है ऐसी और भी बहुत सी चीजें है ..12 वी में ही ABVP से जुड़ा(तहसील अध्यक्ष रहा ) और 2 साल उसके लिए जम कर काम किया उसी दरम्यान आरएसएस की शाखाओं में भी नियमित रूप से गया , वहाँ भी बहुत कुछ सीखा लेकिन आज भी मुझे एक भी नकारात्मकता,सांप्रदायिक बात याद नहीं आती जो कभी संघ की शाखाओं ,बैठकों में कही गयी हो /सिखाई गयी हो ..मै यह बात पूरे दावे के साथ कह सकता हूँ कि संघ की किसी भी शाखा में मुस्लिमों के विरुद्ध या कोई भी सांप्रदायिक बात नहीं कही जाती ..संघ ने हमेशा राष्ट्रवाद की बात की और उसी भावना का प्रचार किया ,,बचपन से ही संघ से जुड़ाव के साथ ही मेरे मन में कभी कट्टरपंथ की भावना नहीं आयी और आगे कभी आयेगी भी नहीं ,दूसरे धर्मो के प्रति आदर हमेशा बना रहा और यही संघ की शाखाओं ने सिखाया भी गया "वसुधैव कुटुम्बकम"की भावना .,2002 गोधरा /गुजरात दंगो के दौरान मुझे बहुत दुःख हुआ था और उस समय मैंने अपने जीवन की सबसे पहली कविता भी लिखी थी ..क्योंकि मेरा मानना तब भी था और अब भी है कि दंगे हिंदू -मुस्लिम के बीच ही नहीं होते बल्कि देश की आत्मा को चोट पहुंचाते है ..
कथित धर्मनिरपेक्ष लोगों /संगठनो द्वारा संघ के बारें में 100 प्रतिशत आधारहीन बातें कही जाती है ये सिर्फ उन लोगों का पूर्वाग्रह है जो संघ को बिना जाने समझे उस पर गलत टिप्पणी करते रहते है ..यहाँ एक बात जरुर स्पष्ट कर दू कि संघ और भाजपा की कार्यशैली अलग है ..संघ से जुड़ाव के बाद भी कई बार मुझे भाजपा के कामों से असहमति हुई ,गुस्सा भी आया ..जो गलत लगा उसका विरोध भी किया और आगे भी करूँगा ..लेकिन अपने कथित प्रगतिशील मित्रों से कहना चाहूँगा कि बिना संघ को जाने हुए संघ पर विषवमन न करें क्योंकि अंध विरोध आदमी का विवेक शून्य कर देता है