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Friday, December 12, 2014

मोदी का पतन उनके सहयोगियों की वजह से होगा

नरेंद्र मोदी को "प्रधानमंत्री मोदी" बनाने का पूरा श्रेय उनके विरोधियों को जाता है ,पार्टी में एक सामान्य सी हैसियत से लेकर मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनने तक विरोधी लगातार मुकर रहें ...लोग विरोध करते रहें और वो आगे बढ़ते गये ,विरोधियो ने रात दिन हर समय ,हर जगह इतना विरोध किया कि वो आम लोगों की नजर में हीरों बनाते चले गये कुलमिलाकर मोदी के उत्थान में विरोधियों का हाँथ रहा लेकिन अब पिछले कई दिनों से देख रहा हूँ कि मोदी के सहयोगी ,भाजपा के लोग ,सांसद उलजुलूल काम कर रहें है ,उटपटांग बातें कर रहें है ,बेवजह बयान दे रहें है जिससे मोदी की छवि खराब हो रही है ,काँग्रेस में तो ऐसे बयान देने वाला दिग्विजय सिंह जैसे एक दो ही लोग थे लेकिन भाजपा में तो ऐसे लोग बहुत ज्यादा है जो मोदी की विकास यात्रा के सबसे बड़े शत्रु है ..लोगों ने मोदी को "विकास " के नाम पर वोट दिया था ...गोडसे ,हरामजादे ,धर्मान्तरण ,मंदिर ,गीता ,हिन्दुराष्ट्र के लिए नहीं दिया ..लोगों को रोटी और रोजगार चाहिए ,ये सब ड्रामा नहीं चाहिए जो आजकल देश में चल रहा है ,जो देश में दिख रहा है ... कहने का सीधा मतलब ये कि मोदी का उत्थान उनके विरोधियों की वजह से हुआ था लेकिन मोदी का पतन उनके सहयोगियों की वजह से होगा ..आप ये बात अपनी डायरी में लिख लीजिए ..बाद में आपको मेरी बात याद आयेगी

Tuesday, December 9, 2014

पुरुष वेश्यावृत्ति का बढ़ता चलन

शशांक द्विवेदी 
देश में इस समय पुरुष वेश्यावृत्ति का चलन तेजी से बढ़ रहा है पिछले दिनों राजस्थान राज्य महिला आयोग ने भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगते जैसलमेर जिले में बढ़ती पुरुष वेश्यावृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि विदेशी पर्यटकों की वजह से ये हालात पैदा हो रहे हैं। राजस्थान में तेजी से पनप रही सेक्स टूरिज्म इंडस्ट्री विकसित हो रही  है जिसका टर्न ओवर करोडों रुपयों का है । इसकी मुख्य वजह रास्थान में बढ़ रहा औधोगिकरण, टेक्सटाइल और मार्बल का व्यवसाय है। देशभर से व्यापार के लिए लोग यहां आ रहे हैं। होटलों में उनके लिए व्यवस्था की जा रही है। पुरुष वेश्यावृत्ति के कारोबार से जैसलमेर स्थित किले के ऊपरी क्षेत्र में रहने वाले एक समुदाय के पुरुष लंबे समय से जुड़े हुए हैं। इनका देह-शोषण करने वालों में विदेशी पर्यटकों की संख्या बहुत ज्यादा है।
जैसलमेर के धौरों में एक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पुरुष और महिलाएं वेश्यावृत्ति के धंधे में लिप्त हैं। महिलाओं के साथ-साथ पुरुष वेश्यावृत्ति भी इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है। जोधपुर, उदयपुर, जैसलमेर के कुछ होटल और इनके कमरे वेश्यावृत्ति (महिला और पुरुष) के लिए चिन्हित हैं। महिला आयोग के अनुसार प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे पर्यटन, भूमि कारोबार, खान, उद्योग की वजह से महिला वेश्यावृत्ति में काफी बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इसके साथ-साथ पुरुष वेश्यावृत्ति का बढ़ना चिंता का विषय है। पाकिस्तान के साथ सीमावर्ती इलाके के अलावा जयपुर  से लगते फागी में भी एक समाज के कुछ परिवारों के पुरुष इस काम में लगे हुए हैं, महिलाएं तो पहले से ही इस धंधे में लिप्त हैं। साथ ही प्रदेश में जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, उदयपुर, पाली, अजमेर, किशनगढ़, सिरोही, बांसवाड़ा और टोंक में यह काराबोर तेजी से बढ़ रहा है। वेश्यावृत्ति के हालात जानने के लिए जैसलमेर पहुंची महिला आयोग की टीम को उस समय यह सुनकर आश्चर्य हुआ जब बारहवीं कक्षा में पढने वाले एक छात्र ने खुद का लम्बे समय से देहशोषण होने की जानकारी दी। पुरुष वेश्यावृत्ति के इस नए धंधे में पुरुष अप्राकृतिक यौन सम्बंध बनाता है या स्त्रियों के काम सुख के लिए पुरुष वेश्या या जिगोलो  बनकर उसे यौन संतुष्ट करता है ।
वेश्यावृत्ति संसार के सबसे पुराने व्यवसायों में से एक है। स्त्रियां इस धंधे में वह खिलौना होती हैं जिनके साथ जब तक मन होता है खेला जाता है और फिर वासना खत्म होने पर धन देकर छोड देते हैं। लेकिन आधुनिकता, अराजकता और पश्चिमी सभ्यता में वासना की पूर्ति के लिए शायद महिलाएं काफी नही। और इनका कहना है कि यह कहां का अन्याय है कि मर्द जब चाहे तब अपनी वासना की पूर्ति के लिए वेश्याओं का सहारा ले और स्त्री अपना मन मार कर रह जाए, इसीलिए एक नए व्यवसाय का सृजन हुआ जिगोलो या पुरुष वेश्याएं. “पुरुष वेश्याएं” सुनकर काफी अटपटा लगेगा लेकिन यह सच है कि आज यह लोग हमारे बीच काफी अधिक मात्रा में मौजूद हैं। जिगोलो का उपयोग महिलाएं अपनी वासना पूर्ति के लिए करती हैं। जब महिलाएं वेश्या बन कर आराम से धन कमा सकती हैं तो पुरुषों में भी यह काम काफी लोकप्रिय हो गया। लेकिन जब कड़वी सच्चाई सामने आती है तो पैरों तले जमीन खिसक जाती है। कई लोगों से शारीरिक संबंध बनाने के चक्कर में एड्स और अन्य एसटीडी (यौन संक्रमित रोग) इन्हें हो जाता है। पुरुष वेश्याओं का समाज में ज्यादा प्रयोग महिलाओं द्वारा किया जाता है खासकर उम्रदराज महिलाओं और विधवाओं द्वारा। कामकाजी महिलाएं जिन्हें घर पर अपने पति से सुख नहीं मिलता वह इन जिगोलो की सर्विस का उपयोग करती है।
लेकिन सबसे अहम सवाल कि रोजगार के इतने साधन होने के बाद भी युवा वर्ग इस दलदल भरे काम को करता क्यों है? सबसे पहले तो यह जिगोलो प्रणाली भारत में अन्य सामाजिक प्रदूषण की तरह पश्चिमी सभ्यता से आई जहां नंगापन सभ्यता का हिस्सा है। पश्चिमी सभ्यता के कदमों पर चलते हुए भारत में भी युवा वर्ग इस काम को करने लगा क्योंकि उसे इस काम में मेहनत ज्यादा नहीं है और कमाई खूब है ।
भारत जहां गरीबी काफी ज्यादा है और रोजगार के साधन सीमित हैं, वहां अच्छे जीवन-शैली की तो छोड़ दीजिए अगर आम जिंदगी भी जीनी है तो काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में बहकते युवा वर्ग को यह काम पैसा कमाने का नया और आसान तरीका लगता है।
भारत एक ऐसी जगह है जहां आपको पानी से लेकर देह सब बिकता नजर आएगा। साथ ही पश्चिमी देशों की नकल करना तो अब भारतीयों की पहली पसंद होती जा रही है। वेश्याओं का भोग करते मर्दों को देखकर उन्मुक्त हो चुकी महिलाओं को अपनी वासना की पूर्ति के लिए जिगोलो के रुप में साधन मिला। और युवाओं के लिए जब पैसा जिंदगी से बढ़कर हो तो कोई काम गंदा या बुरा नहीं मानते। लेकिन जब भी युवा वर्ग इस तरह का कोई नया काम करता है तो हमेशा इसका सही चेहरा ही उसे दिखता है। उसे इस काम में छुपा दूसरा पहलू नजर ही नहीं आता।  जिगोलो का काम कितना बुरा होता है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें पुरुष वेश्या कहा जाता है। महिलाएं पुरुषों को उसी तरह इस्तेमाल करती हैं जैसे वह महिलाओं को करते हैं।
इन सब में सबसे अहम बात छुपी रह जाती है कि भारतीय समाज में यह चीज हमारे संस्कारों और सभ्यता के लिए दीमक की भांति है। जिस युवा पीढ़ी पर जमाने भर का बोझ होता है वह चन्द मुश्किलों के आगे झुक कर इस दलदल में फंस जाता है और अपने भविष्य के साथ मजाक कर लेता है।अगर कानूनी नजर से देखा जाए तो यह बिलकुल मान्य नहीं है। पुरुष वेश्यावृत्ति को भी वेश्यावृत्ति की तरह देखा जाता है और इसे गैर-कानूनी माना जाता है। भारत में वेश्यावृत्ति के खिलाफ कई कानून हैं लेकिन  पुरुष वेश्यावृत्ति के खिलाफ कोई ठोस कानून नहीं है । हालांकि इसके बावजूद भी भारतीय कानून इसे वेश्यावृत्ति ही मानता है। जबकि विश्व स्तर पर इसे मनुष्य के स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़ कर देखा जाता है।
कई बार पुरुष वेश्यावृत्ति को छुपाने के लिए लिव इन रिलेशनशिप का भी सहारा लिया जाता है। ऐसे में महिलाएं साथी के साथ रहती हैं और किसी कानूनी लफड़े से भी बच जाती हैं। जिंदगी को व्यापार बनाकर देखने वाले मानव स्वतंत्रता का उद्घोष करते नजर आते हैं और इस आड़ में अपने छुपे अनैतिक मंतव्यों को पूर्ण करने की ख्वाहिश रखते हैं। क्या भारतीय संस्कृति इतनी लाचार और कमजोर है जो ऐसे दुराचारियों के दबाव में आकर परंपराओं और संस्कृति को तोड़ देगी?कुलमिलाकर राजस्थान सहित पूरे देश में पुरुष वेश्यावृत्ति के बढ़ते चलन को लेकर सरकार को संजीदा होना चाहिए क्योंकि ये काम युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है ।